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सत्यापन और भरोसा

यहाँ भरोसा कहने की नहीं, जाँचने की चीज़ है।

दानदाताओं तक पहुँचने से पहले हर संस्था छह चरण पार करती है, अपने आचरण के साथ चलता एक अंक रखती है, और हर वर्ष फिर से देखी जाती है।

सूची में आना

छह चरण, क्रम से, बिना किसी छूट के।

जब तक छहों स्वीकृत न हों, न कुछ दिखता है और न कोई राशि ली जा सकती है।

  1. 01

    मूल जानकारी

    नाम, पता और पंजीकरण संख्या।

  2. 02

    कानूनी दस्तावेज़

    ट्रस्ट प्रमाणपत्र, PAN, 12A, 80G और बैंक प्रमाण।

  3. 03

    गौशाला या संस्था का विवरण

    गौवंश की संख्या, बीमार पशु, कर्मचारी, ज़मीन और क्षमता।

  4. 04

    स्थान सत्यापन

    GPS स्थान, तस्वीरें और नक्शे पर पुष्ट स्थान।

  5. 05

    प्रत्यक्ष सत्यापन

    हमारा स्वयंसेवक जाकर तस्वीरों सहित रिपोर्ट देता है।

  6. 06

    प्रशासनिक स्वीकृति

    हर निष्कर्ष की समीक्षा के बाद सत्यापित चिह्न मिलता है।

जीवदया सेतु का स्वयंसेवक गौशाला की जाँच करते हुए

भरोसा अंक

यह अंक तभी बढ़ता है जब प्रमाण आता है।

हर सत्यापित संस्था के साथ 100 में से एक अंक दिखता है।

दस्तावेज़ों की पूर्णता

क्या कागज़ात पूरे और वर्तमान हैं?

उपयोग की रिपोर्टिंग

क्या पूरी हुई ज़रूरतें बिल और तस्वीरों के साथ बंद हुईं?

निरीक्षण के निष्कर्ष

हमारे स्वयंसेवकों ने मौक़े पर क्या पाया।

सूची में बने रहना

सत्यापन एक बार का दरवाज़ा नहीं है।

चार अलग-अलग बातें अगले निरीक्षण को आगे खींच सकती हैं, और जो सबसे पहले आए वही लागू होती है।

  1. हर बारह महीने

    पिछले पूर्ण सत्यापन से गिनकर।

  2. भरोसा अंक का बहुत नीचे जाना

    तय सीमा से नीचे जाते ही पुनः सत्यापन तुरंत देय हो जाता है।

  3. किसी दानदाता की शिकायत

    कोई भी खुली शिकायत अगली भेंट को उसी दिन तक खींच लाती है।

  4. समाप्ति के करीब कोई दस्तावेज़

    घड़ी समाप्ति तिथि के बाद नहीं, पहले ही आगे बढ़ जाती है।

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