मुख्य सामग्री पर जाएँ

स्वयंसेवक और निरीक्षक

किसी को सचमुच जाकर देखना ही पड़ता है।

प्रत्यक्ष भेंट सत्यापन का वह हिस्सा है जिसे मेज़ पर बैठकर नहीं गढ़ा जा सकता। जीवदया सेतु यह तंत्र स्वयं चलाता है, और हम उसे अभी बना रहे हैं।

काम क्या है

चार बातें, और इनमें कागज़ी खानापूर्ति एक भी नहीं।

गौशाला तक जाइए

सत्यापन का पाँचवाँ चरण मौक़े पर ही होता है।

जो देखा, वह दर्ज कीजिए

ऐप में तस्वीरों और स्थान के साथ रिपोर्ट।

जो न जँचे, उसे बताइए

जो मेल न खाए वह स्वीकृति से पहले प्रशासक तक जाता है।

हर वर्ष लौटिए

हर बारह महीने में संस्थाओं की दोबारा जाँच होती है।

जीवदया सेतु का स्वयंसेवक गौशाला की जाँच करते हुए

यह किनके लिए है

आपको धैर्य और एक फ़ोन चाहिए, ऑडिट का अनुभव नहीं।

अगर आप अपने ज़िले में यात्रा कर सकते हैं और साफ़ तस्वीरें ले सकते हैं, तो यही काम है।